Monday, August 8, 2011

इंतजार में बैठी हूँ ?

आप का इंतजार में ..
मै बैठी हूँ |
कभी घड़ी को देखू 
कभी अपनी से फ़ोन को देखू ||
आप की आवाज सुनने को बेक़रार 
है ये दिल 

कि कब आयेगा 
आप का फ़ोन 
इतना तो इंतजार मत 
कराओ कि कडवी हो जाए |

हर पल -हर घड़ी 
हर सास हर आवाज 

आप को पुकारे रही है 
यह क्यू समझ  नही पाते हो तुम 
इतना तो इंतजार तो मत कराओ
*****************************

Saturday, August 6, 2011

THANKS FOR ALL OF YOU

आप सब का बहुत बहुत प्यार 
आप सब का धन्यवाद 

कि आप सब ने मुझे ब्लॉगर के रूप में स्वीकार 
कर के मुझे उत्साह देने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ....
इस तरह उत्साह बढ़ाते  रहिये 

ऐसी मोहब्बत


हाय ! ऐसी मोहब्बत

इस भरी दोपहरी में, क्यूँ शमा जलाए बैठी हो |
किसका इंतजार है , जो द्वार खोले बैठी हो||


ये कैसी तलब है, जो पलके बिछाए बैठी हो|
ये कैसी तन्हाई है, जो बेचैन हुए बैठी हो
||

निकला पतझड सावन, निकला बसंत-बहार |
किसका इंतजार है, जो आस लगाए बैठी हो ||


कैसे कैसे राज़ जो ख़ामोशी ने छिपायें रखे है |
हाय ! ऐसी मोहब्बत जो परदेसी से कर बैठी हो ||




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Friday, August 5, 2011

यह दिल कहता है | कि ........

जब बारिश होती है |
मेरे मन में  आवाज 
यह विचार आता है कि.....
यह छन छन करती 
बारिश  कि आवाज
     इतनी मधुर क्यों है......

विचार आता है
कि इसी में डूब जाऊ
मन करता है मै
उछालू कुदूँ और नाँचू-गाऊँ.........

मेरा दिल कहती है कि ....इसमे अपने को इतना
भीगूँ और भिगाँऊ ..... स्वर्ग का आनन्द मनाऊँ..
...ताकि जीन में, खुशियों की कमी  रह न जाये 

इसकी  छम छम करती  यह स्वर ....
कितना अनुपम और मधुर है..
यह बारिश .........



..

Thursday, August 4, 2011

पूछता है दिल बार- बार


पूछता है दिल बार- बार 

पूछता है दिल बार-बार
कैसे होता   है प्यार ?

तुम मुझे प्यार की परिभाषा
बतलाते हो.
मुझे नहीं सुननी
तुम्हारी प्यार की परिभाषा

मुझे पता है
क्या होता  है

तुम बतला सकों
तो सिर्फ़ इतना बता दो
की कैसे होता है प्यार ?

मैं भी प्यार करके देखना चाहती हूँ
प्यार में जीने- मरने कि क़समें
मैं भी खा के देखना 
चाहती  हूँ

अब मुझे नहीं रहा जाता

पूछता है दिल बार-बार
कैसे होता है प्यार ?

Wednesday, August 3, 2011

बारिश के दिन

आज का मौसम जरा सर्द है 
दिल में उठा क्यू दर्द है |
यादे पहली बारिश की 
लेकी ये आता है 
तन मन फिर मेरे 
बड़ा अच्छा लगा जब मिट्टी की वो सौंधी खुशबू आई,
चारों तरफ के माहौल में ज़रा सी ठंडक लाई,
सड़कें धूलिं, पेड़-पत्ते धुले
सभी को छाते की ज़रुरत समझ आई…
सबके चेहरे खिल उठे, अचानक
तापमान नें भी कुछ कमी आई…
बारिश आई… देखो बारिश आई…

बारिश में मस्त 

Monday, August 1, 2011

कुछ पाने की आश

सब कुछ लूटकर  भी हम अपना,
कुछ पाने  की आस लगाये  बैठे है.

सीने  में सुलग  रही है अरमान कई ,
जिन्हें  अपना दोस्त बनाये  बैठे है.

जानते  है तुम साथ नही मात्र हो,

फिर भी हम तुमको अपनी धड़कन बना बैठे है 
जब से मिला है .....
दिल  की  नाज़ुक  धडकनों  को
मेरे  सनम  तुमने  धडकना  सिखा  दिया


जब  से  मिला  है  तेरा  प्यार  दिल  को
ग़म  ने  भी  मुस्कुराना  सिखा  दिया .


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