Monday, July 18, 2011

मज़ेदार चुटकुले



1.अध्यापक," बाबर भारत मे कब आया?"
बंटी, "पता नही सर।"
अध्यापक, " बोर्ड पर नही देख सकते, नाम के साथ ही लिखा है।"
बंटी, मैने सोचा, शायद वह उसका फ़ोन नम्बर है।"


2.अध्यापक ने दूसरी कक्षा  के एक बच्‍चे से कहा, मैने  कल  तुम्हें जो हिंन्दी मे पाठ पढाया था, उसे सुनाओ ।
बच्‍चे ने कहा, टीचर आता नही है।
इस पर अध्यापक ने कहा, नही आता तो ऐसा करो जो आता है वही सुनाओ ।
बच्‍चे ने कहा, मुझे तो गाना आता है वही सुना दूँ ?
3.मेरी बीबी का अपहरण करके ले जा रहे हो, तो ले जाओ, लेकिन तुम को बहुत पछताना पडेगा।
क्यो?
क्योकि जबसे मै इसे ब्याह्कर लाया हूं , तभी से मै पछ्ता रहा हुं।

4.प्रमी- क्या मै सचमुच पहला मर्द हूं जिसने तुम से प्यार किया है?
प्रमिका - हां, लेकिन सभी मर्द यही सवाल क्यो पूछते है ?

5.पुत्र (पिता से), पिताजी मुझे ढोल ख्ररीद दीजिए न!
न बेटे, तू ढोल बजाकर मुझे तंग किया करेगा ।
पुत्र- नही पिता जी, मै तो तब बजाऊगा जब आप सो जाया करेंगे।

6.बच्चा अपने दोस्त से बोलाः कल मेरे घर लडका पैदा होगा !
   दोस्तः वाह, क्या बात कर रहे हो, पर तुम्हे कैसे पता की लडका ही पैदा होगा ।
    बच्चा बोलाः अरे साफ है, पिछली दफा मेरी मम्मी को पेट दर्द हुआ था 
   और उसके अगले दिन मेरी मम्मी को लडकी पैदा हुई ।
   इस बार मेरे पापा को पेटदर्द हो रहा है, तो बात साफ है कि लडका ही पैदा होगा !

Sunday, July 17, 2011

प्रभु से करता मैं दुआ ||

|मेरे सेवा केंद्र के 
कैंसर पीड़ितों की तरफ से 

चारो तरफ गहरा धुआं 
कलेजे में चुभता सुआ 

आपकी हर अदा अच्छी
मोतिया-बिन्द जो हुआ 

पैरासिटामाल खाई फिर भी 
दर्द ने दिल भी छुआ 

चाँद को घूरो मत ऐसे
वो न रोटी न पुआ |


दर्द में काम  आये विद्या 
प्रभु से करता मैं  दुआ ||

पैरासिटामोल


पैरासिटामोल से हो सकता है कैंसर

paracetamol
वॉशिंगटन।। अगर आप सिर दर्द या बुखार में आंख बंद कर पैरासिटामोल लेते हैं तो आपको ब्लड कैंसर हो सकता
है। नई रिसर्च के मुताबिक, इस दवा के अधिक सेवन से रक्त कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।रिसर्चरों ने पाया कि पैरासिटामोल में एसिटामिनोफेन नामक रसायन पाया जाता है, जो कैंसर का मुख्य कारक है। स्टडी में दर्द निवारक दवा और उनसे कैंसर के खतरे की बात में एक नया मोड़ ला दिया है।
रिसर्च में शामिल सिएटल स्थित हचीसन कैंसर रिसर्च सेंटर की एमिली वाइट ने कहा, ‘ हमारे पास कुछ साक्ष्य मौजूद हैं जिनके आधार पर पता चलता है कि एसिटामिनोफेन से रक्त कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। शुरुआत में एसेटामिनोफेन को दमा के लिए जिम्मेदार समझा जाता था। ‘
रिसर्चरों ने वॉशिंगटन में 65 हजार लोगों पर की गई स्टडी में पिछले 10 वर्षों में उनके द्वारा इस्तेमाल की दर्दनिवारक दवाओं के बारे में पूछा। पहले इनमें किसी को भी कैंसर नहीं था। लेकिन पिछले छह सालों में इनमें से 577 लोगों में ब्लड कैंसर के लक्षण पाए गए। जिन लोगों में कैंसर के लक्षण पाए गए उनमें से 9 % ने इस दौरान काफी मात्रा में एसेटामिनोफेन का सेवन किया था।
हेड रिसर्चर डॉ. रेमंड ने कहा, ‘एसिटामिनोफेन अन्य दर्दनिवारकों के मुकाबले अलग तरह से काम करता है। इसलिए इसका कैंसर पर अलग प्रभाव होता है। यह चौंकाने वाला तथ्य है कि एसिटामिनोफेन के इस्तेमाल से ब्लड कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

अगर आपको love everbody  का यह प्रयास पसंद आया हो, 
-- 

ब्लॉग की दुनिया

तैरता था मेरे चारो और सन्नाटा अकेलेपन का

बाँट नही पाता था मै दर्द अपने मन का 
सूनी आँखे मेरी कुछ ढूंडती थी शून्य मे 
दूर तक पसरा उदास आसमान 
और धरा पर विखहरी पीली जर्द चाँदनी 
मेरे मन की पीड़ा को और बढ़ाती थी 
तभी मन के उदास बादलो के बीच 
एक चमकी बिजली 
और कर गयी मेरे मन की धरा को प्रकाशित 
मेरे हृदया की वीणा के तारो को झंकृत 
और तब मेरे तपते मन पर, रिमझिम बरसात हो गयी 
मेरी सूनी सी आँखे खुशियो से भर गयी 

और मै ब्लॉग की दुनिया मे मशरूफ हो गया 
जो मेरा अब एक अलग ही संसार � सब कुछ था 

Saturday, July 16, 2011

दर्द भरे दिल की आवाज

महिलाओ का दर्द 
मोहब्बत
रिश्ते नाते प्यार मोहब्बत
मेरे तो दुनिया थे वह मगर |

सब रह कर भी मेरे कोई नहीं 
मेरे तो दुनिया थे वह |

लगता है अब रो दू 
रिश्ते नाते प्यार मोहब्बत
सब छुट है |

प्यार को मै जब -जब तलास करती हु 
मिलता तो है 
मगर धोका ?

क्या करे ?
यह आसू पोछने वाला भी कोई 
नही है ?

सब है मगर कोई नही 
कितनी इतनी महिलाये  है 
वह कह नही सकती 
अपने ही अंदर घुटती   रहती है |

क्या करे वह?
सब अपने अंदर समा के रखती है |
क्या वह प्यार के हक दार नही ?


आप की क्या राय 

कविता: "माँ "का प्यार "

माँ  हमें हमेशा अपने  अचल में  छिपाके रखती है |
वह अपने दूध से सिचती है || 
पल पोस कर बढ़ा करती है| 
वह  क्यसा  भी क्यु न हो ||
यही माँ का प्यार है |||


प्यारी जीवन दायिनी माँ!,    
प्यारी जीवन दायिनी माँ!,                  
जब मैनें इस जीवन में किया प्रवेश
पाया तेरे ऑंचल का प्यारा-सा परिवेश
मेरे मृदुल कंठ से निकला पहला स्वर माँ!
पूस की कॅंपी-कॅपी रात में, तूने मुझे बचाया।
भीगे कम्बल में स्वयं सोकर, सूखे में मुझे सुलाया॥
तब भी नहीं निकली तेरी कंठ से, एक भी आह।
क्योंकि तुम्हें थी मेरे चेहरे पर, प्यारी हँसी की चाह॥
तुम ही थी माँ, जिसने चलना सिखाया।
मुझ अबोध बालक को, अक्षर ज्ञान कराया॥
तेरे ही दम पर, भले-बुरे को परखना सीखा।
जीवन में आई विषम परिस्थितियों से, लड़ना सीखा॥
मेरे हदय की हर धड़कन, जुड़ी है तुझसे।
इसीलिए मॉ मेरा, कुछ भी नही छुपा है तुझसे॥
जब भी होता हूँ सुख-दुख में, तुम मुझे याद आती हो।
जब होता हूं उलझन में, तुम ही राह दिखाती हो।
ऐसा लगता है मानो, मेरे सिर पर तुम्हारा ह्यथ है॥
हर घड़ी हर समय हर पल, तुम्हारा ही साथ है।
सागर की गहराई सा, गगन की ऊंचाई सा, तेरा प्यार।
जीवन भर मुझे मिलता रहे, यही है तमन्ना बार-बार॥
प्यारी जीवन दायिनी माँ !



Friday, July 15, 2011

" चाँद"

ऐसे दिख रही है ज़िन्दगी
कविता में
जैसे चाँद पर से
दिखती धरती
हेलीकॉप्टर से दिखती
चढ़ी हुई नदी और बाढ़


उतनी दूर नहीं
पर जितनी साफ़ उजली बेपर्द
बिल्कुल नंगी उद्विग्न
साबुत और तार-तार


घुटनों तक धँसी आत्मा
लिथड़ी है कीचड़ में
चाँद पर सुनाई पड़ रही
धरती की चीख़-पुकार...

आप की ईच्छ्ये बाटिये 
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