Thursday, November 3, 2011

"एक मुक्तक" (विद्या)

एक मुक्तक
बेसबब कोई कभी रोता नही।
नूर आँखों का कोई खोता नहीं।
दीप-बाती का मिलन तो व्यर्थ है,
स्नेह जब तक साथ में होता नहीं।

19 comments:

  1. बहुत सुन्दर, बधाई.

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  2. बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

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  3. अरे वाह!
    आपने तो बहुत सुन्दर मुक्तक लिखा है!
    मगर पोस्ट लगाने में विलम्ब क्यों करती हैं आप!

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  4. लाज़वाब भाव...बहुत सुंदर

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  5. bahut achche bhaav bilkul sach hai.

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  6. बहुत सुन्दर और सटीक बात कही है ..

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  7. कल के चर्चा मंच पर, लिंको की है धूम।
    अपने चिट्ठे के लिए, उपवन में लो घूम।।

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  8. बहुत ही सुन्दर क्षणिका है विद्या जी ! बधाई !

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  10. प्रभावशाली रचना...
    शुभकामनायें आपको !

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  11. वाह! खूबसूरत मुक्तक है

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  12. रोता नहीं है कोई भी किसी और के लिए
    सब अपनी अपनी किस्मत को ले लेकर खूब रोते हैं
    प्यार की दौलत को कभी छोटा न समझना तुम
    होते है बदनसीब ,जो पाकर इसे खोते हैं

    http://madan-saxena.blogspot.in/
    http://mmsaxena.blogspot.in/
    http://madanmohansaxena.blogspot.in/

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  13. Nyc lines mam

    form ceo of http://www.pztheshayar.com

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