Wednesday, August 17, 2011

क्या परी हो तुम

खुशनसीब होतें हैं वो
खुदा जिन्हें खुबसूरत बनाता है
सवारता है फुरसत भरे लम्हों में
किसी के प्यार की मूरत बनाता है
उनमे से एक आप भी हैं!

सूरज सी लाली दमक रही हो
जिसकी झील सी आँखों तले
सुर्ख होंठो की मुस्कान ऐसी
देख जिसे गुलाब भी जले
उनके नाजुक पाँव पड़े जिस पथ
वो अपने पर इतराता है
उनमे से एक आप भी हैं


कोरे कंगना कवारे सवारे कलाई
जिसकी रूह की महक से
ये वादियाँ गुनगुनाई
घनेरी ज़ुल्फों की लहर
जैसे गंगा की आरती
मदहोश फ़िज़ाए भी
जिसके रूप को सवांरती
उनमे से एक आप भी हैं!
सच में,
खुशनसीब होतें हैं वो………..! “


19 comments:

  1. बहुत खूबसूरत रचना लिखी है!
    परी का बहुत ही अच्छा चित्रम किया है आपने इस पोस्ट में!

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  2. बहुत खूबसूरत रचना लिखी है!
    परी का बहुत ही अच्छा चित्रण किया है आपने इस पोस्ट में!

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  3. बहुत ही सुन्दर रचना,शानदार और उम्दा प्रस्तुती!

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  4. बहुत सुन्दर वर्णन किया है.बधाई.

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  5. खुबसूरत भावाभिवय्क्ति....

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  6. जितनी सुन्दर तस्वीर उतनी ही सुन्दर कविता! उम्दा प्रस्तुती!
    http://urmi-z-unique.blogspot.com/
    http://amazing-shot.blogspot.com

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  7. बहुत प्यारी तस्वीर और उससे भी प्यारी आपकी रचना .badhai
    blog paheli

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  8. sundarta to aatma ki hoti hai, bahya sundarta aakarshan hoti hai

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  9. yah to hamen bhi achhi lagi badhai

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  10. बहुत अच्छा चित्रण किया आपने | बहुत सुन्दर कविता |

    मेरे भी ब्लॉग में आयें |

    मेरी कविता

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  11. अरे कमाल का लिखा है आज तो……………मेरे पास तो शब्द कम पड गये है तारीफ़ के लिए ………अद्भुत्।

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