Saturday, August 20, 2011

***प्यार और दोस्ती ***

स्वार्थ अगर होता है  
तो फिर प्यार नहीं टिकता है।
सजे-धजे बाजारों में
तो प्यार नहीं बिकता है।
जिसने प्यार किया हो सच्चा,
वो ही तो इसको पहचाने,
दिल के हर कोने में वो ही,
शब्द प्यार के लिखता है।।
इस रचना को मैं अपने सबसे प्यारे दोस्त को
समर्पित कर रही हूँ!

13 comments:

  1. बहुत सुन्दर और प्रेरणा देने वाला मुक्तक लिखा है आपने!
    शुभकामनाएँ!

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  2. बहुत ही बढि़या ।

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  3. बढ़िया भावनाएँ...
    सादर बधाई...

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  4. बहुत ही खुबसूरत....

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  5. बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति..

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  6. अच्छा लगा,शुभकामनाएँ।

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  7. दिल के हर कोने में वो ही,
    शब्द प्यार के लिखता है।

    खूबसूरत स्पष्ट अभिव्यक्ति ....
    हार्दिक शुभकामनायें !

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  8. सुंदर भाव, सुंदर पंक्तियां।

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  9. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  10. Pyar ki bahut acchhi paribhasha batayi hai aapne.. aabhar..

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मैं अपने ब्लॉग पर आपका स्वागत करती हूँ! कृपया मेरी पोस्ट के बारे में अपने सुझावों से अवगत कराने की कृपा करें। आपकी आभारी रहूँगी।

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