Thursday, July 21, 2011

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है ।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है ।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है ।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में ।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो ।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम ।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती !



9 comments:

  1. हर शब्द बोलता हुआ....मन को छूते भाव....बहुत खूब |

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  2. मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
    कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ।
    kya baat hai ,
    dil ki baat juban pe aayi to aur hi sunder ho gyi.......
    utkrist rachna ke liye badhai

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  3. बहुत सुन्दर रचना .ये तो हमने पहले भी सुना है की कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती पर विद्या जी हर बार ये बात स्वीकार नहीं होती..

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  4. हाँ जी बिलकुल सही कहा आपने.... बस हर बार hame ये मान कर hi हर सफ़र पर चल देना चहिये....

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  5. सरक-सरक के निसरती, निसर निसोत निवात |
    चर्चा-मंच पे आ जमी, पिछली बीती रात ||

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  6. बहुत सुन्दर शब्दचित्र उकेरा है..बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  7. This comment has been removed by the author.

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